मैंने पंडित को नाकार दिया

मैं खूब पाठ-पूजा करता था  मैंने MA करते ही एक सिखों की संस्था में अध्यापक के रूप में काम शुरू किया। मेरी तनखाह तब सिर्फ 1600 रुपये प्रति माह थी। वह स्कूल पहाड़ो में एक घाटी में था इसलिए वहां ठण्ड बहुत पड़ती थी। वह स्कूल बाकी समाज से लगभग कटा हुआ था क्योंकि यह Read more about मैंने पंडित को नाकार दिया[…]

Break The Rule 2019

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