होस्टिंग क्या होती ...
 

होस्टिंग क्या होती है-2  

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Joga Singh
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03/03/2018 4:54 pm  

वेबसाइट बनाने से सबसे पहले आपको यह फैसला लेना है की आप इस वेबसाइट के जरिए किस तरह की सेवाएं देना चाहते है? क्या समाजिक बदलाव पर काम करना चाहते है या अपना कोई प्रोडक्ट बेचना चाहते है या फिर आप कुछ अपनी सेवाएं देना चाहते है? सबसे पहले आपको अपना डोमेन नेम तय करना होगा। वेबसाइट बनाने के तीन मुख अंग है डोमेन, होस्टिंग एंड वेबसाइट डिज़ाइनिंग

आज हम होस्टिंग पर थोड़ा चर्चा करेंगे। देखिए अगर आप मकान बनान चाहते है तो सबसे पहले आपको एक प्लाट लेना होगा। इसको आप होस्टिंग कह सकते है। यानी कि सर्वर पर आपको अपनी कॉन्टेंट को रखने के लिए कुछ जगह चाहिए। जैसे अगर आपने मकान की दीवारे बनाने है तो आपको पहले जगह चाहिए।

फिर आपको मकान बनाने का की समाग्री चाहिए जैसे सीमेंट, ईंटें, सरिया इत्यादि। आपको इस समाग्री से यह देखना होगा की बेड रूम कहाँ बनाना है, बाथरूम किधर बनाना है आदि अदि। या बेड रूम बनाना, चारदीवारी बनाना, गेट बनाना, सफेदी करवाना, फर्नीचर लगाना ये सब वेबसाइट डिज़ाइनिंग में आता। लेकिन याद रखना वेबसाइट डिज़ाइनिंग होस्टिंग के बिना नहीं बनेगा।

दीवारे खड़ी करने से भी पहले आपको होस्टिंग लेनी होगी। यह होस्टिंग किराए पर मिल जाती है। इसके अलग अलग पलैन है। मैंने शुरू में 1200 रूपए साल के लिए होस्टिंग ली तो मेरी वेबसाइट की स्पीड बहुत कम थी। फिर मैंने पांच हजार साल वाली खरीदी तो मेरी समस्या दूर हो गयी। होस्टिंग भी कई तरह की होती है। एक तो यूं समझिए की पीछे से एक नल में पानी आ रहा है लेकिन आगे जाकर वह पानी कईयों  के घरो में नलों द्वारा भेज दिया जाए या बाँट दिए जाए।

तो स्वाभाविक है अगर 15 घरो की पानी दिया जाएगा तो पानी बंट जाएगा। और सबको थोड़ा थोड़ा मिलेगा और पानी का प्रेशर भी मूल पाइप से कम होगा। इस तरह की होस्टिंग को शेयर्ड होस्टिंग कहते है।  लेकिन जब आपकी जरूरत ही कम हो और आप ज्यादा पैसा भी नहीं खर्चना चाहते तो स्वाभाविक है आप कम प्रेशर से भी काम चला लेते हो। ख़ास करके जब आप शुरू शुरू में वेबसाइट बनाओगे तो आपके साईट पर बहुत लोग नहीं आएंगे तो स्वाभाविक है आप बहुत सस्ती होस्टिंग से काम चला सकते हो।

लेकिन ज्यों ज्यों आपके ब्लॉग पर टैफिक बढ़ेगा तो स्वाभाविक है आप उनको एक अच्छा अनुभव देना चाहोगे हो तो फिर आप थोड़े अच्छे प्लैन खरीद सकते हो। आगे जाकर अगर आपकी वेबसाइट की स्पीड कम हुई तो गूगल बाबा भी आपसे नाराज हो सकता है और आपके बहुत सारे ग्राहक भी शायद दोबारा आपकी वेबसाइट पर ना आए। शुरू में आप 200 रूपए महीना में अच्छा काम चला सकते हो।

 जब आपकी साईट पर काम और ट्रेफिक बहुत जयादा बढ़ जाता है और आप नहीं चाहते कि लिंक जरा सा भी टूटे तो फिर आप डेडिकेटिड सर्वर ले सकते हो। इसका मतलब जितने प्रेशर से पानी पीछे से आ रहा है उतना प्रेशर ही आपको दिया जायेगा। एक स्पेशल पाइप लाइन आपके लिए बिछा दी जाएगी जो वायरलेस होगी और आपको निरंतर बढ़िया स्पीड मिलेगी।

 ज्यादातर बैंको के पास इंटरनेट की ऐसी ही डेडिकेटिड स्पीड होती है। एक और तरह की होस्टिंग भी होती है उसको हम कहते है मल्टी लिनेक्स होस्टिंग यानी आप एक बार होस्टिंग ले लो तो आप इसमें अनगिनत वेबसाइट चला सकते है। जैसे आप एक प्लाट ले लो लेकिन आप इसपर 50 मंजिला मकान खड़ा कर दे। आगे चलकर आपको इसकी भी जरूरत पड़ सकती। हमारी ब्रेक दा रूल वेबसाइट पर मेरी यह इच्छा है कि हम आपको वेबसाइट डिजाइनिग, होस्टिंग और डोमेन फ्री में दे #bTr।


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