सोशल मीडिया पर बहुत...
 

सोशल मीडिया पर बहुत सी समभावनाएँ है  

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Joga Singh
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Posts: 12
03/03/2018 2:27 pm  

आज सोशल मीडिया पर बहुत सी समभावनाएँ है। मैंने आज से 6 साल पहले एक साईट बनाई थी जो की एक फोरम थी।  मैं और मेरा दोस्त इस पर बहुत लिखते थे। बहुत मेहनत करते लेकिन कोई विजिटर नहीं आता था। मैं इधर उधर फेसबुक पर बहुत लिंक देता लेकिन कोई हमारी फोरम पर नहीं आता। कई साल मैं उस फोरम से आस लागए बैठा रहा।

 एक तो हमारे पास किसी एक्सपर्ट को देने के लिए ज्यादा पैसे नहीं थे दूसरा जो हमारा मार्गदर्शन कर रहा था उसे भी कोई ज्यादा पता नहीं था और ना ही उसके पास हमारे लिए वक्त था। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। मैं हमेशा कुछ अच्छे को आकर्षित करता रहा। कई साल बाद मेरे संपर्क में एक ऐसा आदमी आया जिसने मेरी सोशल मीडिया के बारे में राय बदल दी।

 वहां से मुझे पता चलने लगा कि मैं पिछले 5 साल में क्या गलती कर रहा था? उसके बनाए हुए कोर्स निहायत ही सस्ते थे। जैसे उसका एक कोर्स जिसकी कीमत सिर्फ 2000 रुपये थी वह मेरे लिए बहुमूल्य साबित हुआ। उससे ही मुझे पता चाला कि आज आपको पारम्परिक प्रकाशन से किताब छपवाने की जरूरत नहीं।

 मुझे सबसे बड़ी यह चिंता रहती कि अगर मेरी किताब बिकने लगी तो प्रकाशक ज्यादातर रॉयल्टी नहीं देते। और किताब प्रकाशित करने के लिए काफी पैसा चाहिए।  और फिर आज के युग में किताब बेचना निहायत ही मुश्किल है। उसन मुझे बताया कि आज किताब प्रकाशित करने के लिए किसी प्रकाशक के पास जाने की जरूरत नहीं।

 आप ऑनलाइन किताब खुद ही बिना एक पैसा लगाए प्रकाशित कर सकते हो। मैंने कहा कि ऐसे तो किताब चोरी होने लगेगी।  लोग फ्री में बांटने लगेंगे।  मुझे बाद में पता चला कि आप एमाजोन पर पांच मिनिट में किताब प्रकाशित कर सकते है और बिना एक पैसा लगाए। और एक एक  रॉयल्टी का पैसा आपके खाते में ऑटोमेटिकली आएगा।

 और ख़ास बात यह है कि यह किताब पूरी दुनिया को नजर आएगी। और भी ख़ास बात यह कि कोई इस किताब को उधार नहीं दे सकता।  जिस फ़ोन के ऐप में यह किताब आएगी वही लोक हो जाएगी।  आप इसको आगे शेयर नहीं कर सकते। और इससे भी बड़ी बात यह है कि एक पब्लिशर आपको 15 % से जयादा रॉयल्टी नहीं देगा लेकिन ऐमज़ॉन आपको 70 % रॉयल्टी देगा।

 अगर आपकी ई- बुक अच्छी चालती है तो ऐमज़ॉन पर ही प्रिंट एडिशन भी बिना एक पैसा खर्चे प्रकाशित करवा सकते हो। मैंने जब अपनी पहली किताब छपवायी तो मैं 100 कॉपी भी नहीं बेच पाया था क्योंकि मैं पारम्परिक तरीका अपना रहा था। इस नए तरीके से आप घर बैठे लाखो किताबे बेच सकते हो। हम ब्रेक दा रूल की वेबसाइट पर एक स्पेशल पोर्टल प्रकाशन के लिए रखेंगे जहाँ लोगो को प्रकाशन से सम्बंधित फ्री जानकारी दी जाएगी।

 आखिर देश में बदलाव तो लाना है और और बदलाव तब नहीं आएगा जब तक हर आदमी सक्षम नहीं होगा? एक लाचार और बेसहारा आदमी देश के बारे में क्या सोचेगा? ब्रेक दा रूल का मकसद आपको सक्षम करना है, आपको कामयाब करना है। आप ताकतवर होंगे तो देश ताकतवर होगा। आप बदलोगे तो देश बदलेगा #bTr


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