हमारी जीवन में रूचि नहीं है

दो फुटबाल की टीमें खेल रही है और दोनों देशों के लोग इस मैच को देख रहे है I अब हैरानी की बात यह है कि दोनों ही देशो के लोगो की रूचि मैच में नहीं है I वो खेल का आनंद तो ले ही नहीं रहे I उनकी रूचि तो इस चीज में है कि कौनसा देश जीतेगा? अगर उनके देश की टीम गोल करती है तो वो ताली बजाते है वर्ना वो निराश हो जाते है I इसका मतलब यह है की खेल में उनकी रूचि बिलकुल नहीं I

हमने जीवन को एक साजिश में बदल दिया

उनकी रूचि उनकी टीम जीतने में है I खेल मूलतया आनंद लेने के लिए होता है पर आपने इसको नाटक में बदल दिया, आपने इसको एक साजिश में बदल दिया I यानि कि जो होना चाहिए वह नहीं हो रहा I सब कुछ उल्ट हो रहा है I यानी कि हमने चीजों को उलटे तरीके से पकड़ा हुआ है I यानि कि हम हमारे स्वभाव के उल्ट काम कर रहे है I हमारी सोच दूषित हो चुकी है है I हम जीवन को, भगवान को और धर्म को भी इसी तरह से उल्ट ले रहे है और नतीजे भी उल्ट आ रहे है I

हमारा नजरिया विकृत है

आदमी दिन-रात धर्म-कर्म करता नजर आ रहा है लेकिन वास्तव में वह जो भी कर रहा है वह गलत है I हमारा शिक्षा, सेक्स, औरत, सेहत, प्यार, मानवता, राष्ट्रवाद, गौमाता और भारत माता के प्रति भी कुछ इसी तरह का त्रुटिपूर्ण नजरिया है और परिणाम यह है कि आज आदमी के पास सब कुछ है बस एक इंसानियत ही नहीं बची I