हम खुद के दुश्मन है

सेक्स में ऐसी कौनसी बुरी बात है?

अगर आप ट्रेफिक  के नियम नहीं मानते तो उसी वक्त दुर्घटना हो जाएगी। साथ के साथ आपको दंड मिल जायेगा। अगर आप किसी को अपशब्द बोलते हो तो साथ के साथ वोआदमी प्रतिक्रिया देगा और आपको लगेगा की आपने कुछ बुरा किया जो नहीं करना चाहिए था। अगर आप गलत खाना खा लेते हो तो साथ के साथ ही आपकी सेहत खराब हो जाएगी। यानी बुरा काम करने का नतीजा भी बुरा होता है। तो मैं आपसे ये पूछना चाहता हूँ कि सेक्स में ऐसी कौनसी बुरी बात है कि लोग इस शब्द का प्रयोग करने से भी डरते है।

सेक्स को आखिर किसने बदनाम किया?

क्या सेक्स को करने से पेट में दर्द हो जाता है या किसी गुरु फ़क़ीर का अहित हो जाता है। या फिर सेक्स करने से बदहजमी हो जाती है। इतनी अच्छी चीज को आखिर किसने बदनाम किया। कौन है इस षड्यंत्र के पीछे? सेक्स एक ऐसी प्रक्रिया है जिसने आप सबको जन्म दिया। तो फिर ये अछूत कैसे हो सकती है, ये पाप कैसे हो सकती है? ये तो खाना खाने और पानी पीने जैसी एक सव्भाविक प्रक्रिया है। एक तरफ तो हर आदमी सेक्स का दीवाना है और दूसरी तरफ इसका नाम भी लेना पाप है।

आपने सेक्स को सही से समझा नहीं

 

जब तक आप इस साजिश को नहीं समझते तब तक आपको अध्यात्म तो क्या मिलना है, आपमें कॉमन सेन्स भी नहीं पनपेगी। और अगर सेक्स जैसे मुद्दे पर पूर्णतय अनभिज्ञ है तो आपको आत्मा परमात्मा जैसी जटिल और काल्पनिक चीजे कैसे मिलेंगी? हमारा जीवन कितना बड़ा अन्धविश्वास है आप इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते है की यहां तक अंग्रेज लोग जो बहुत खुले विचारों के है वो भी सेक्स से सम्बंधित वीडियो की अनुमति फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया पर नहीं देते। यानी उनके लिए भी सेक्स निषेध है।

सम्भोग भी स्तन-पान जैसा है

एक और बड़ा अन्धविश्वास ब्रह्मचर्य को लेकर है। ब्रह्मचर्य का मतलब वासना को बिना सम्भोग ख़त्म करना। यह ऐसे ही है जैसे कि बिना खाना खाये भूख को मिटाना। वैसे मुझे आजतक यह समझ नहीं आया कि धर्म संभोग का दुश्मन क्यों है? जैसे बच्चे के पैदा होने के बाद अगर माँ के स्तन से दूध निकले ही ना, तो माँ बीमार हो जाएगी। जितना दूध निकलता है उतना ही दूध वाली ग्रंथिया और मजबूत होती चली जाती है। अगर अभी बच्चे ने दूध पिया है तो

2 घंटे बाद ग्रंथियां उतना ही दूध फिर बना देती है। इसी तरह से सेक्स ग्रंथियों में से जितना वीर्य निकलता है वह उतना ही स्वस्थ होती चली जाती है।

सेक्स से मुहं पर ताजगी आयेगी

जितना आप सेक्स करते जाओगे उतना आप बलशाली होते जाओगे और आपके मुह पर तेज भी बढ़ता जायेगा। जैसे हम स्तनपान कराते है, ऐसे ही सेक्स करना है। दोनों ही परस्थितियों में ग्रंथियों से स्राव होता है। तो फिर एक पवित्र और दूसरा अपवित्र क्यों? जबकि दोनों ही जीवन देने वाली प्रक्रियाएं है। लेकिन विडम्बना यह है की किसी ने आज तक इस धारणा को बदलने की कोशिश नहीं की। हमारा हर काम हमारे स्वभाव के विरुद्ध है। यह ऐसे है जैसे हमने खुद से दुश्मनी मोल ले रखी हो।

 

1 thought on “हम खुद के दुश्मन है

  • सर मैं आपकी किताब पढ़कर अधिक से अधिक प्रचारित करना चाहता हूं !!

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