हमेशा कुछ नया आजमाओ

बेटा रूल तोड़ने लगा

एक बार की बात है मैं एक शहर टोहाना में रहता था। मेरा बेटा तब 18 साल का होगा। वो पढ़ाई में इतनी रुचि नहीं लेता था और ज्यादातर घर से बाहर रहता था। जब भी हम उसको फ़ोन करते कि तुम कहां तो वह बोलता कि बस यही हूं, बस गली में हूँ, एक दोस्त के साथ बात कर रहा हूं। मुझे बहुत चिंता रहती की यह गलत संगति में अगर पड़ गया तो क्या होगा? मैं उसको बहुत समझाता लेकिन उस पर इस चीज का कोई असर नहीं पड़ता था। मैं रोज सुनता था फलां बच्चे का क़त्ल उसके दोस्तों ने कर दिया और फलां बच्चा ज्यादा ड्रग्स लेने की वजह से मर गया।

मैंने भी रूल तोड़ दिया 

यानी कि एक ऐसी बुरी व्यवस्था पनप गयी थी जिसका कोई इलाज नजर नहीं आ रहा था। इस नकारात्मक व्यवस्था को हम रूल कहते है। फिर अचानक मेरा तबादला एक और शहर ऐलनाबाद हो गया। वहां मैं एक साल रहा और मैंने वहां से एक साल बाद बदली करवा ली क्योंकि ऐलनाबाद मुझे पसंद नहीं था। अब मेरी जगह कोई और होता तो अपना तबादला वापिस उसी शहर टोहाना में करवाता जहां मैं 8 साल रह चुका था, जहां मेरा अपना घर भी था और परिवार भी यहीं रहता था। लेकिन मैंने इस रूल को तोडा और अपना तबादला नारायणगढ़ में करवा लिया। नारायणगढ़ टोहाना से 200  किलोमीटर दूर था। अब बाद में मेरा परिवार भी वही आ गया ।

बेटे की पुरानी संगती टूट गयी

यहां नयी जगह पर एक बहुत बड़ा बदलाव यह आया कि बेटे की पुरानी संगति को ब्रेक लग गयी जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था। वह अब घर पर ही रहने

लगा क्योंकि इस नए शहर में उसको कोई नहीं जानता था और उसकी यहां टोहाना जैसी नयी संगति नहीं  पनपी। मुझे बहुत सकून मिला। अब बेटे में मैं यह बदलाव मैं टोहाना में रहकर कभी नहीं ला सकता था । शायद वहां मैं हमेशा दुखी रहता। ख़ास बात यह है कि नारायणगढ़ में आकर कितना अच्छा होने वाला था इसकी मुझे जरा सी भनक तक नहीं थी।

मैं पुराने से तंग आ चुका  था

और इस समस्या  का हल कोई बाबा, साधु या ग्रन्थ नहीं कर सकता था। इसका हल सिर्फ मैं कर सकता था। बस मैं पुराने को नहीं दोहराना चाहा रहा था। मैं कुछ नया आजमाना चाहा रहा था। मैं पुराने से तंग आ चुका  था। मेरी हमेशा से एक और इच्छा थी कि मैं पहाड़ो पर रहूँ  लेकिन नौकरी  हरियाणा  में थी तो यह मेरा पहाड़ो वाला सपना कभी पूरा नहीं हो सकता था। लेकिन जब मैं नारायणगढ़ आया तो देखा कि नारायणगढ़ पहाड़ो से सटा क्षेत्र है।  यहां का मौसम बहुत अच्छा है और लोग भी अच्छे है।

यह बदलाव मेरे लिए अनमोल था

लेकिन यह सब तभी सम्भव हुआ जब मैंने पुराने से मोह तोडा, जब मैं पुराने से उक्ता  चुका  था । कम से कम मैं इतना फैसला ले चुका था कि मैं वापिस मुड़कर नही देखना चाहता था। रूल तोड़ने से पहले आपको कुछ नजर नहीं आएगा, लेकिन अगर आप अपने जड़त्व को तोड़ते हो तो बहुत से नए हसीं नज़ारे देखने को मिलेंगे जिनकी आपने पहले कल्पना भी नहीं की होगी। अगर मैं अपना पिछला शहर न छोड़ता तो शायद बेटा इतना बिगड़ जाता और हो सकता कोई बड़ा हादसा हो जाता तो फिर जिंदगी में क्या बाकी रह जाता? यह जो बदलाव बेटे में आया यह मेरी नजरो में अनमोल था।

 

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Break The Rule 2018

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