संघर्ष बहुत जरूरी है 

देखिए, जब भी कोई खोज होती है तो उसका एक इतिहास होता है। जितने भी पश्चिम में वैज्ञानिक हुए उन्होंने खोजे की तो उनके संघर्ष की आपको एक लंबी कहानी मिलेगी। जिसने बल्ब बनाया था तो उसने बहुत लंबा संघर्ष किया था।

एक वैज्ञानिक को जब स्कूल से निकाल दिया गया तो उसकी माँ उसको घर पर पढ़ाने लगी। क्योंकि घर मे बहुत गरीबी थी तो माँ को नौकरी करनी पड़ी। और वह वैज्ञानिक खुद ट्रेन में अखबार बेचता था। उसने ट्रेन के एक डिब्बे में अपने लिए एक छोटी सी लैब भी बनाई हुई थी।

एक दिन तो उस लैब में ही आग लग गई और इसी वजह से गार्ड ने उसको खूब पीटा। इस वैज्ञानिक ने आगे चलकर दुनिया की तस्वीर बदल दी। ऐसा ही एक और वैज्ञानिक था जिसने घर मे ही एक लैब बनाई हुई थी और एक दिन उसकी लैब में विस्फोट हो गया और उसके बेटे की उस धमाके में मौत हो गई।

भारत में कोई आविष्कार नहीं हुआ 

लेकिन वह रुका नही और उसने एक दिन दुनिया को बहुत बड़ा अविष्कार दिया। यानी कि किसी भी महान काम के पीछे बहुत बड़ा संघर्ष होता है , एक अलग कहानी जन्म लेती है।

लेकिन क्या आपने कभी किसी हमारे वैज्ञानिक की कभी कोई ऐसी कहानी सुनी है है? अगर आपने परमाणु विस्फोट किया तो इसके पीछे बहुत लंबा संघर्ष तो रहा होगा, आपके बहुत से विज्ञानिको ने इसमें योगदान भी दिया होगा। क्या आपने कभी भारत मे कोई ऐसा अविष्कार होता देखा जिसको देखकर आपको लगा हो कि यह अविष्कार किसी बडे काम को जरूर अंजाम देगा।

ये माना कि सारे अविष्कार आप तो नही कर सकते। अविष्कारों की एक लड़ी होती है। हर अविष्कारक इस लड़ी में कुछ ना कुछ जोड़ जाता है। लेकीन क्या आपने कभी सुना कि किसी भारतीय अविष्कारक ने इस लड़ी की कभी कोई कड़ी जोड़ी हो?

 प्रतिशत खोजें पिछले बीस साल में हुई 

आज तक जितनी भी खोजे हुई उनका अस्सी प्रतिशत पिछले बीस साल में हुई तो इनमें हमारा क्या योगदान है ताकि हम कह सके कि मंगल यान हमने खुद बनाया है। आज की जितनी आधुनिक चीजे है उनमें कितनी चीजो के साथ हमारे वैज्ञानिकों का नाम जुड़ा है।

अब मान लो हमने युद्धक टैंक का इंजन खुद बनाया होता तो सारी दुनिया मे खबर फैल जानी थी और मान लो आपने मंगल यान का इंजिन बना भी लिया था तो उसके बाद क्या हुआ? क्या आपको इस क्रायोजेनिक इंजिन खरीदने के विदेशों से आपको ऑर्डर मिले? बिल्कुल नही।

दुनिया में भ्रस्टाचार में हम नंबर वन है 

यानी कि आपकी दुनिया की इतनी बड़ी उपलब्धि लेकिन किसी देश ने आपकी इस उपलब्धि में रुचि नही ली। और मुझे तो एक ओर बड़ी हैरानी होती है कि आपकी सारी ट्रेनें घंटो लेट हो जाती है, आपके देश मे एक भी मीटिंग वक्त पर शुरू नही होती, एक भी आपकी यूनिवर्सिटी दुनिया की टॉप की 200 यूनिवर्सिटी में नही, भ्रस्टाचार, बेईमानी, साम्प्रदायिकता में आप दुनिया मे नंबर एक पर हो लेकिन आपका स्वदेशी यान पहले ही झटके में दूसरे आसमान पर जाकर फिट हो जाता है।

 हमारा प्रधान म्नत्री भी झूठ बोलता है 

आप देखना जैसे करिश्मे

आपके इतिहास में होते आये है वैसे आज भी हो रहे है और हर वक्त हो रहे है। अब पाकिस्तान रोज नई मिसाइलें दाग देता है और कहता है

ये सब स्वदेशी है। क्या आपको लगता है पाकिस्तान में शिक्षा का स्तर इतना ऊंचा होगा कि वो मिसाइलें बना सके। वो भी आपके ही भाई हैं बस आपसे कहीं कुंभ के मेले में बिछड़ गया था।

अब देश का प्रधान मंत्री लाल किले से इतना बड़ा झूठ बोलता है कि हमने स्वदेशी मंगल यान बना दिया और भक्तों ने इसे बड़े सहज तरीके से हजम कर लिया और एक लंबा डकार मार दिया। जब बिना कुछ किये इतने यश मिल सकता है तो फिर जीवन मे कोई जोखिम लेने की क्या जरूरत है

इसी तरह का आपका झूठ तब मुझे नजर आता है जब आप कहते हो धर्म और संत तो ठीक है लोग गलत है। आदमी इतिहास से बहुत सीखता है हम अतीत में बहुत समृद्ध रहे है हमारी संस्कृति बहुत महान है